– विभिन्न मांगों को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स का कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। विभिन्न मांगों को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा कि वित्त विधेयक-2025 में पेंशनरों में तिथि के आधार पर विभेद पैदा करने वाले अंश को हटाया जाए, केंद्रीय आठवें वेतन आयोग के गठन के बारे में जारी नोटिफिकेशन के पेंशन पुनरीक्षण, अन्य पेंशनर्स लाभों को सम्मिलित किए जाने और पेंशनर्स को गैर-अंशदायी और गैर वित्त पोषित बताए जाने वाले बिंदु को हटाया जाए।

इस दौरान उन्होंने बताया कि हमारे संगठन द्वारा कहा गया था कि तिथि के आधार पर पेंशनरों में वर्ग विभाजित न किया जाये, क्योंकि हमेशा से कर्मचारीयों और पेंशनर्स को साथ-साथ रखा जाता रहा है। इस बिन्दु को लेकर प्रदेश ने हमारे संगठन द्वारा 22 अप्रैल और 15 जुलाई को भारत
सरकार के ध्यानाकर्षण के लिए धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया जा चुका है। लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि, संसद में आपकी सरकार के प्रवक्ता के रूप में अश्विनी वैष्णव द्वारा इस आशय का बयान भी स्पष्ट रूप से दिया गया था कि, प्रस्तावित वेतन आयोग में सबका ध्यान रखा जायेगा और पेंशनर्स भी लाभान्वित होंगे। जबकि, सरकार के अन्य अधिकारियों द्वारा भी इसी आशय के बयान दिये जाते रहे हैं। इस विधेयक से कोई हानि पेंशनर्स को नहीं होगी, किन्तु आठवें वेतन आयोग के नोटिफिकेशन को देखने से स्पष्ट हो गया कि यह विधेयक पेंशनर्स को हानि पहुंचाने के लिए ही लाया गया है। इसलिए इसे वापस लिया जाए।
उन्होंने कहा कि, उच्चतम न्यायालय में डीएस नाकरा की याचिका में पूर्ण पीठ ने 17 दिसंबर को निर्णय दिया था कि पेंशनरों में तिथि के आधार पर कोई भेद नहीं किया जा सकता है, क्योंकि पेंशन
सरकार द्वारा दी गई कोई कृपा, दान या अनुग्रह नहीं है, बल्कि कर्मचारियों एवं शिक्षको द्वारा की गयी लम्बी सेवाओ का प्रतिफल है और यह सेवाकाल का लम्बित वेतन है। इसलिए समिति के सदस्य यह मांग करते हैं कि, पेंशनर्स की समस्याओं का ध्यान रखते हुए सभी मांगों को पूरा किया जाए।


