– मोनाड यूनिवर्सिटी के चेयरमैन बाइक बोट घोटाले के बाद फर्जी मार्कशीट में फंसे।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। बाइक बोट घोटाले के आरोपी व मोनाड यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जी मार्कशीट मामले में जेल में बंद चल रहे विजेंद्र हुड्डा पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। मेरठ में दो दिन पहले हुई कार्रवाई इसका एक बड़ा उदाहरण है। भले ही विजेंद्र हुड्डा सलाखों के पीछे हैं लेकिन यह तय है कि आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। बाइक बोट घोटाले व मोनाड यूनिवर्सिटी से जुड़ा मामला ईडी देख रही है।
गुरुवार को ईडी ने मोनाड यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में कंकरखेड़ा शिवलोकपुरी में स्थित विजेंद्र हुड्डा के मकान पर रेड की। करीब आठ घंटे कार्रवाई चली लेकिन ईडी को कुछ हाथ नहीं लगा। शाम करीब सवा छह बजे ईडी की टीम नोटिस लगाकर वहां से लौट गई।
गाजियाबाद के दादरी में वर्ष 2010 में गर्वित इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी रजिस्टर्ड हुई। करीब 8 साल बाद इसी कंपनी ने बाइक बोट नाम से एक प्रोजेक्ट लॉन्च किया। प्रोजेक्ट के अंतर्गत 62000 निवेश करने थे। निवेश करने वाले को प्रति माह 9500 दिए जाने थे। काफी लोगों ने इसमें निवेश किया और उनके खातों में रकम भी पहुंचने लगी।
अनुमान है कि इस घोटाले में देश भर के 2 लाख से अधिक निवेशकों से लगभग 3 हजार करोड़ से 15 हजार करोड़ तक की ठगी की गई। इसी दौरान एक नई स्कीम भी लॉन्च कर दी गई। 1.24 लाख रूपए का निवेश करने पर निवेशक को 17 हजार रूपए महीना मिलने थे। लालच में बड़ी संख्या में लोगों ने स्कीम ज्वाइन कर ली। कुछ महीने तक निवेशकों को रिटर्न मिला और उसके बाद अचानक कंपनी बंद हो गई। हंगामा खड़ा हो गया और मामले में ईडी को जांच सौंप दी गई। संजय भाटी इस वित्तीय घोटाले का मुख्य आरोपी है।
इसकी गिरफ्तारी के बाद ही विजेंद्र हुड्डा के नाम का खुलासा भी हुआ था। फर्जी डिग्री का मामला 2023 अक्टूबर में सामने आया था। एसटीएफ की टीम ने आॅपरेशन शुरू करते हुए राजस्थान, हरियाणा व पंजाब में इसी यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट और डिग्री पकड़ीं। एसटीएफ ने खुद ग्राहक बनकर और रकम देकर यह साक्ष्य जुटाए। सभी डिग्री पिलखुवा स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी के कार्यालय से जारी की गई और यहां इनका रिकार्ड अपडेट किया गया।
यूनिवर्सिटी ने इन सभी फर्जी डिग्री का सत्यापन करते हुए सही बताया। इसके बाद एसटीएफ लखनऊ यूनिट ने 17 मई को छापा मारा। 1372 फर्जी मार्कशीट, 262 फर्जी प्रोविजनल व माइग्रेशन बरामद किए। 18 मई को एसटीएफ ने मोनाड यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र हुड्डा समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया और सलाखों के पीछे भेजा। तब से विजेंद्र हुड्डा सलाखों के पीछे चल रहे हैं।
विजेंद्र ने जेल से भागने का भी किया प्रयास
फर्जी मार्कशीट प्रकरण में गाजियाबाद की डासना जेल में बंद मोनाड यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा ने जेल से भागने का भी षड्यंत्र रचा लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसमें सिपाहियों की संलिप्तता सामने आई, जिन्होंने वारदात का प्रयास किया। बाद में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक आरोपी विजेंद्र सिंह का रिश्तेदार है। इसने ही विजेंद्र की फरारी का पूरा षड़यंत्र रचा लेकिन सफलता नहीं मिली। इसमें मुकुल तोमर निवासी बागपत और वंश सेनी निवासी मुजफ्फरनगर को गिरफ्तार किया गया था। जेल प्रशासन ने शक होने पर कमिश्नर से शिकायत की। जांच कराई गई तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
राजनीति के सहारे जिले में दी दस्तक
बाइक बोट घोटाले में अपने आप को सुरक्षित करने के बाद विजेंद्र हुड्डा ने देश का रुख किया। वह लंबे समय विदेश में रहे। लोकदल के बैनर तले कई बड़ी सभाएं की और दर्शा दिया कि वह कुछ बड़ा करने वाले हैं। जिस तरह प्रचार चल रहा था, उसको देखकर लगने लगा कि जल्द लोकदल उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर देगी लेकिन उससे पहले ही विजेंद्र हुड्डा ने बीएसपी ज्वाइन कर ली।
बिजनौर लोकसभा सीट से उन्होंने टिकट की तैयारी कर दी। जल्द ही बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने उनके नाम पर मोहर भी लगा दी। जबरदस्त तरीके से उन्होंने अपना चुनाव प्रचार किया लेकिन इसके बावजूद बीएसपी तीसरे स्थान पर रही। चुनाव के तुरंत बाद विजेंद्र हुड्डा पर शिकंजा कसना शुरू हो गया।


