Homeउत्तर प्रदेशMeerutमेरठ: नगर निगम संपत्ति अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई

मेरठ: नगर निगम संपत्ति अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई

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  • संयुक्त व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ ही श्रद्धालुओं ने की निगम अधिकारियों से मुलाकात।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। कासमपुर में छठ मैया पर जेसीबी चलाये जाने के मामले में मेरठ व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने भोलानाथ के विरुद्ध नगर निगम के अधिकारी अपर नगर आयुक्त व सहायक नगर आयुक्त से मुलाकात की।

 

 

जहां सभी ने मांग उठाई कि भोलेनाथ के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। छठ मैया पर जेसीबी चलाये जाने की विभागीय जांच कराई जाए। छठ मैया को सम्मान के साथ उसी स्थान पर स्थापित किया जाए। पूर्वांचल के रहने वाले लोगों को उस स्थान पर छठ पूजा करने के लिए नगर निगम अपनी ओर से छठ मैया पूजा स्थल का निर्माण करा कर दे। कासमपुर में पहाड़ी के पास तमाम अवैध निर्माण की पैमाइश करवा कर सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त करवाया जाए।

कासमपुर पहाड़ी में नगर निगम की जमीन है। अतिक्रमण होने की शिकायत पर तीन-चार साल पहले निगम ने पैमाइश कर वहां तारबंदी कर दी थी। तारबंदी के अंदर घुसकर कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। इसकी शिकायत स्थानीय वार्ड-9 की पार्षद रेशमा सोनकर ने नगर आयुक्त से की थी। बुधवार को जमीन कब्जामुक्त कराने के लिए सहायक नगर आयुक्त शरद पाल, संपत्ति अधिकारी भोला नाथ गौतम सहित निगम की टीम और प्रवर्तन दल के साथ कासमपुर में पहुंच गए। निगम टीम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। झोपड़ी तोड़ी और जमीन कब्जा मुक्त कर दी।

बुलडोजर चलने की जानकारी लगने पर स्थानीय निवासी कृष्णमोहन सिंह, सुजय सिंह, राजू रंजन सिंह, एमएल पांडेय, पदमा सिंह, रेणु सिंह, डीके सिंह, ओमप्रकाश सिंह आदि वहां पर पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच साल पूर्व कासमपुर पहाड़ी पर पूर्वांचल छठ मैया के नाम से एक मंदिर बनाया था। जहां पर हर साल छठ मैया की पूजा की जाती है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर से मंदिर को तोड़ दिया। स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद बुलडोजर को नहीं रोका गया। अतिक्रमण अभियान जारी रहा और जमीन को कब्जा मुक्त कर दिया है।

मंदिर टूटने की जानकारी पर मेरठ व्यापार मंडल महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा कार्यकतार्ओं के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप लगाया कि निगम के अधिकारियों को स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी पहले देनी चाहिए थी। अगर निगम की टीम नोटिस देती तो वह अपने देवी-देवताओं को मंदिर से विधि-विधान के साथ हटा लेते। इसी मामले को लेकर आज फिर से व्यापारी नेता के नेतृत्व में लोग निगम अधिकारियों से मिले।

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