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Wednesday, January 14, 2026
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चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न के मायने

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राजनीतिक दलों ने बैकफुट पर रह कर टिप्पणी की।


Editor Gyan Prakash
ज्ञान प्रकाश, समूह संपादक |

लोकसभा चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं बचा है। हर राजनीतिक दल अपनी अपनी चुनावी बिसात बिछाने में लगा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा करके राजनीति की दुनिया में हलचल मचा दी है। वेस्ट यूपी की राजनीति में जाट वोट हमेशा से निर्णायक रहे है। किसान आंदोलन के कारण भाजपा से नाराज चल रहे किसानों को खुश करने के लिए चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा एंटीबायोटिक्स का काम कर सकती है, ऐसा भाजपा को लग रहा है जो स्वाभाविक भी है।

पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी ने जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए गठबंधन से जुड़ने का संकेत दिया वो जाट वोट बैंक को भाजपा की तरफ भेजने की तरफ मजबूत कदम माना जा रहा है। वेस्ट यूपी में जाट, गुर्जर, त्यागी, मुस्लिम और यादव वोट काफी महत्वपूर्ण माने जाते है। इसमें जाट बेल्ट बागपत, मुजफ्फरनगर,मथुरा, बिजनौर आदि में भाजपा को अब ज्यादा दिक्कतें नही होंगी। भले ही भाजपा भारत रत्न को राजनीति से दूर बता रही है लेकिन हकीकत यही है कि भाजपा ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के बीच सारी संभावनाओं पर ब्रेक लगवा दिया।

इसका अहसास उस वक्त हुआ जब सपा प्रमुख ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा कुछ भी कर सकती है। अब भाजपा नेताओं ने ये कहना शुरू कर दिया है कि चरण सिंह का भाजपा से गहरा संबंध रहा है क्योंकि 1967 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को यूपी का मुख्यमंत्री बनाने के लिए जनसंघ के सौ विधायकों ने समर्थन दिया था। यही नहीं प्रधानमंत्री के कार्यकाल में भाजपा का बड़ा योगदान था, हालांकि कांग्रेस ने सरकार गिरा दी थी।

कांग्रेस, सपा और अन्य राजनीतिक दल भाजपा के मास्टर स्ट्रोक भारत रत्न को लेकर बैकफुट पर रहकर शुभकामनाएं दे रहे है। इसी तरह देश के पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव को भारत रत्न देकर भाजपा आंध्र प्रदेश में अपने कमजोर पक्ष को मजबूत करने का प्रयास करेगी तभी भाजपाई ये कह रहे है नरसिम्हा राव ने देश में आर्थिक उदारीकरण को मजबूत किया और कांग्रेस ने उनके निधन पर कांग्रेस मुख्यालय में शव लाने की इजाजत नहीं दी और अंतिम संस्कार भी दिल्ली में नही होने दिया था। भारत रत्न के मास्टर स्ट्रोक का झटका शायद 12 फरवरी को तेज लगेगा जब रालोद प्रमुख जयंत चौधरी अपने स्वर्गीय पिता चौधरी अजीत सिंह के जन्मदिन पर एनडीए में शामिल होने की घोषणा करेंगे।

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